Monday, June 24, 2013

केदारनाथ में तबाही का कारण देवी का प्रकोप

(प्रेसवार्ता)

Img1130624003 1 1देहरादून। वह क्या वजह थी कि अचानक एक ग्लेशियर फटा और उसी दौरान गौरीकुंड और रामबाड़ा के बीच एक बादल भी फट गया। वह क्या वजह थी कि केदारनाथ के आसपास का सबकुछ तबाह हो गया सिर्फ केदारनाथ के मंदिर को छोड़कर? 16 जून को शाम छह बजे धारी देवी की मूर्ति को हटाया गया और रात्रि आठ बजे अचानक आए सैलाब ने मौत का तांडव रचा और सबकुछ तबाह कर दिया जबकि दो घंटे पूर्व मौसम सामान्य था।
      श्रीनगर गढ़वाल क्षेत्र में एक बहुत ही प्राचीन सिद्ध पीठ है जिसे 'धारी देवी' का सिद्धपीठ कहा जाता है। इसे दक्षिणी काली माता भी कहते हैं। मान्यता अनुसार उत्तराखंड में चारों धाम की रक्षा करती है ये देवी। इस देवी को पहाड़ों और तीर्थयात्रियों की रक्षक देवी माना जाता है। महा विकराल इस काली देवी की मूर्ति स्थापना और मंदिर निर्माण की भी रोचक कहानी है। मूर्ति जाग्रत और साक्षात है।
     बदरीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग पर श्रीनगर से करीब 15 किलोमीटर की दूरी पर कलियासौड़ में अलकनन्दा नदी के किनारे सिद्धपीठ मां धारी देवी का मंदिर स्थित है, लेकिन नदी पर बांध बनाने के चक्कर में कांग्रेस सरकार ने इस देवी के मंदिर को तोड़ दिया और मूर्ति को मूल स्‍थल से हटाकर अन्य जगह पर रख दिया।
     पिछले दो वर्षों से इस मंदिर को बचाने के प्रयास के तहत, राज्य सरकार, केंद्र सरकार और राष्ट्रपति तक को पत्र ल‍िखे गए और कोर्ट में यह मामला था, लेकिन किसी ने भी आस्था के इस प्राचीन केंद्र पर विचार नहीं किया।
     पिछले दो वर्षों से इस मंदिर को बचाने के लिए आंदोलन चल रहा था। आंदोलन में हजारों साधु-संतों, सामाजिक कार्यकर्ताओं एवं पर्यावरणविदों ने भाग लिया था। लेकिन उत्तराखंड की सरकार ने इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया और अंतत: उत्तराखंड की रक्षक देवी मानी जाने वाली 'धारी देवी' के शक्तिपीठ को तोड़ दिया गया।
     समूचा हिमालय क्षेत्र मां दुर्गा और भगवान शंकर का मूल निवास स्थान माना गया है। इस स्थान पर मानव ने जब से अपनी गतिविधियां बढ़ाना शुरू की है तब से जहां प्राकृतिक आपदाएं बढ़ गई है वहीं यह समूचा क्षेत्र अब ग्लेशियर की चपेट में भी आने लगा है।

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