ये नशा ना जाने कितने घरो को धीरे धीरे खोखला बना रहा है | घर-परिवार और बच्चो के भविष्य की चिंता छोड़ लोग नशे में इस कदर तल्लीन है की उन्हें आगे कुछ भी नहीं सूझ रहा की उनके ना रहने पर उनके परिवार और बच्चो का क्या होगा| इस नशा खोरी की लत आजकल के बच्चो पर भी पूरी तरह से अपना असर दिखा रही है गली मोहल्ले में कम उम्र के बच्चो के मुह में तम्बाकू और हाथो में सिगरेट जलती हुई नज़र आने लगी है| हमारी सरकार को जनता की कोई परवाह नहीं है वो तम्बाकू वाले जहर खा कर मरे या नशीली दवाओं से उसे तो सरकारी खजाने भरने से मतलब है| कुछ प्रदेशो ने इसकी रोकथाम के लिए कदम बढ़ा कर इस पर प्रतिबन्ध भी लगा दिया है| पर न जाने इस उत्तर प्रदेश में हमारे आलाकमान कब जागेंगे? शराब की अपेक्षा ऐसी नशीली दवाओ की कीमत बहुत कम है जिससे गरीब तबके के लोग इसे अधिक इस्तेमाल कर रहे है| यही वजह है की मेडिकल की दुकानों में इसकी मांग अधिक बढ़ी है |
हम बात कर रहे थे शहर की मेडिकल दुकानों में बिकने वाले नशीले जहर की, शहर के कुछ मेडिकल स्टोर इन दवाओं की बिक्री बिना किसी अधिकृत डॉक्टर के पर्चे पर करते है और मोटी कमाई कर रहे है| खुले आम इन दवाओं का इस्तेमाल भी उन्ही मेडिकल स्टोर पर भी कराया जाता है जहाँ बकायदा उनके लिए ग्लास और पानी भी मुहया कराया जाता है |
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