Friday, June 28, 2013

मेडिकल स्टोर में बिक रही नशीली मौत !

-इमरान ज़हीर 

drug.jpgमुरादाबाद : " नशा... नशा...नशे में हम धुआ धुआ ये ज़िन्दगी" ये गाना मुरादाबाद शहर में कुछ ज्यादा ही हिट साबित हुआ है जिसके बाद लोग इसी नशे में झूमते हुए नज़र आ रहे है| ये नशा शराब से भी है और सिगरेट से भी लेकिन इससे अलग भी एक नशा है नशीले दवाओं से जिसे हम ड्रग्स भी कहते है | शहर हो या गाँव हर जगह नींद की दवाओ का बेजा इस्तेमाल हो रहा है इस नशे  के खेल में बिक रही दवाओ की बिक्री से अंदाज़ा लगाया जा सकता है की आखिर दवाओ का प्रयोग कहा किया जा रहा है | मेडिकल स्टोर वालो की जैसे चांदी हो गई, बिक्री बढ़ी और मुनाफा भी| ऐसी दवाएं किसी अधिकृत डॉक्टर के पर्चे पर ही दी जाती है लेकिन किसी पर्चे के ना होने पर इन दवाओ को मनमाने दाम में बेच कर अधिक मुनाफा कमाने के चक्कर में लोगो की ज़िन्दगी से खिलवाड़ किया जा रहा है| 

ये नशा ना जाने कितने घरो को धीरे धीरे खोखला बना रहा है | घर-परिवार और बच्चो के भविष्य की चिंता छोड़ लोग नशे में इस कदर तल्लीन है की उन्हें आगे कुछ भी नहीं सूझ रहा की उनके ना रहने पर उनके परिवार और बच्चो का क्या होगा| इस नशा खोरी की लत आजकल के बच्चो पर भी पूरी तरह से अपना असर दिखा रही है गली मोहल्ले में कम उम्र के बच्चो के मुह में तम्बाकू और हाथो में सिगरेट जलती हुई नज़र आने लगी है| हमारी सरकार को जनता की कोई परवाह नहीं है वो तम्बाकू वाले जहर खा कर मरे या नशीली दवाओं से उसे तो सरकारी खजाने भरने से मतलब है| कुछ प्रदेशो ने इसकी रोकथाम के लिए कदम बढ़ा कर इस पर प्रतिबन्ध भी लगा दिया है| पर न जाने इस उत्तर प्रदेश में हमारे आलाकमान कब जागेंगे? शराब की अपेक्षा ऐसी नशीली दवाओ की कीमत बहुत कम है जिससे गरीब तबके के लोग इसे अधिक इस्तेमाल कर रहे है| यही वजह है की मेडिकल की दुकानों में इसकी मांग अधिक बढ़ी है | 

हम बात कर रहे थे शहर की मेडिकल दुकानों में बिकने वाले नशीले जहर की, शहर के कुछ मेडिकल स्टोर इन दवाओं की बिक्री बिना किसी अधिकृत डॉक्टर के पर्चे पर करते है और मोटी कमाई कर रहे है| खुले आम इन दवाओं का इस्तेमाल भी उन्ही मेडिकल स्टोर पर भी कराया जाता है जहाँ बकायदा उनके लिए ग्लास और  पानी भी मुहया कराया जाता है |

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