Wednesday, October 2, 2013

16 भारतीय भाषाओं में दिखाए जाएंगे ”चाइल्ड” और ”धुंआ ” का विज्ञापन

चाइल्ड और धुंआ विज्ञापनों को धूम्रपान एवं सेकेंडहैंड धुएं की स्वास्थ्य लागत के बारे में चेतावनी के रूप में विकसित किया गया है। 

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने तंबाकू रोधी दो नए विज्ञापन जारी किए हैं: ”चाइल्ड” और ”धुंआ ”। यह विज्ञापन सिगरेट और अन्य तांबाकू उत्पाद (व्यापार एवं वाणिज्य, उत्पादन, आपूर्ति और वितरण का विज्ञापन एवं विनियमन का निषेध) अधिनियम(कोटपा) नियमों के तहत कल जारी किए गए। विज्ञापन उन फिल्मों एवं टीवी में दिखाए जाएंगे जिनमें धूम्रपान करते हुए किसी व्यक्ति को दिखाया गया हो। यह विज्ञापन आज 2 अक्तूबर, 2.013 से प्रभावी होंगे। 

यह विज्ञापन 16 भारतीय भाषाओं में डब किए गए हैं तथा सारे भारत में दिखाए जाएंगे। जब कभी सिनेमा हाल में फिल्म के अंग के रूप में धूम्रपान करते हुए व्यक्ति को दिखाया जाए तो इन विज्ञापनों को प्रमुखता से दिखाना अनिवार्य है। यह विज्ञापन मीडिया के लिए स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय में अपर सचिव श्री सी के मिश्रा ने जारी किए।

सिगरेट और अन्य तांबाकू उत्पाद (व्यापार एवं वाणिज्य, उत्पादन, आपूर्ति और वितरण का विज्ञापन एवं विनियमन का निषेध) अधिनियम(कोटपा) नियमों के अनुसार तंबाकू रोधी स्वास्थ्य विज्ञापन और घोषणा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय उपलब्ध करा रहा है। मुकेश और स्पंज दो विज्ञापन 2 अक्तूबर, 2012 से लागू किए गए थे जिनमें धूम्रपान और तंबाकू के हानिकारक इस्तेमाल को दिखाया गया था। 

नए विज्ञापन जारी करते हुए श्री सी के मिश्रा ने कहा कि चूंकि 2 अक्तूबर, 2013 को भारत में धूम्रपान मुक्त कानूनों के लागू होने के पांच साल पूरे हो रहे हैं इसलिण् ये दो नए विज्ञापन इस दिन शुरू किए जा रहे हैं। चाइल्ड और धुंआ विज्ञापनों से भारत में सेकेंडहैंड धुंए और धुंआ-रहित नीतियों के कार्यान्यन पर सरकार के बल का पता चलता है। 

चाइल्ड और धुंआ विज्ञापनों को धूम्रपान एवं सेकेंडहैंड धुएं की स्वास्थ्य लागत के बारे में चेतावनी के रूप में विकसित किया गया है। इनमें चाइल्ड विज्ञापन धूम्रपान और सेकेंडहैंड धुंए के स्वास्थ्य जोखिमों पर केंद्रित है तथा धुंआ विज्ञापन खासतौर से बिजनेस प्रबंधकों, वकीलों, प्रवर्तन अधिकारियों, धूम्रपान करने वालों और धूम्रपान नहीं करने वालों के संभावित व्यवहार के बारे में है। यह विज्ञापन विश्व लंग फाउंडेशन ने विकसित किए हैं। 

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