मुरादाबाद, उत्तर प्रदेश: दो जून की रोटी के लिये खतरों का खेल| ये तस्वीर बयान करती है उस गरीबी और भूख का जिसके लिये कोई कुछ भी कर सकता है, लेकिन मुद्दा ये है की क्या एक २.५ वर्षीय बच्ची की जान जोखिम में डाल कर रोटी का इंतज़ाम करने वालो को ऐसी रोटी रास आएगी? सबसे हैरान करने वाली बात ये है की हमारे देश में ऐसे लोग मौजूद है जो ऐसे खेल को देख कर तालियाँ बजाते नज़र आते है ना की ऐसे जोखिम भरे खेल का विरोध करते हुए|
अभी हाल ही में मुरादाबाद के दस सराये पुलिस चौकी के ठीक सामने एक २.५ वर्षीय बच्ची द्वारा ऐसा ही जानलेवा खेल को अंजाम दिया जा रहा था लोगो की भीड़ उसके इस काम के लिये तालियाँ बजाती नज़र आ रही थी,वही पुलिस कर्मी इसे बड़े मज़े से देखते हुए अपना मनोरंजन कर रहे थे| एक छोटी बच्ची द्वारा एक पतली रस्सी पर हवा में चलने का खेल देख कर हर किसी को ये डर भी था कही ये बच्ची गिर ना जाये लेकिन किसी ने ना तो इसका विरोध किया और ना ही हमारे पुलिस कर्मी ने उसे रोका| एक मासूम की जान जोखिम में डाल कर दो वक़्त की रोटी का जुगाड़ करने वाले उसके परिजन भी उसके हौसला अफजाई के लिये उसका तालियों से स्वागत करते हुए नज़र आ रहे थे| हट्ठे-कट्ठे परिजन को देख कर कोई भी कह सकता था की एक मासूम की जान जोखिम में डाल कर ऐसी रोटी कमाने वाला उस बच्ची का हितैषी नहीं हो सकता|
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