मुरादाबाद , उत्तर प्रदेश: हम बच्चे है जानवर नहीं... शायद ये कथन इन बच्चो के मुह पर ज़रूर होगा इस तस्वीर से भली प्रकार से अंदाज़ा लगाया जा सकता है की आज स्कूल प्रबंधतंत्र को मासूम बच्चो की पीड़ा से नहीं वरन मोटी फीस से प्यार है| बच्चो को जानवरों की तरह वाहनों में इस तरह से ठूस ठूस कर भर कर ले जाना बेहद ही चिंता का विषय है|
ऐसा ही नज़ारा रोज़ सुबह और स्कूल की छुट्टी के समय देखने को मिल जायेगा| ऐसा नहीं है की इस नज़ारे से स्कूल प्रबंधतंत्र वाकिफ नहीं है| प्रतिदिन बच्चो को जानवरों की तरह भर कर स्कूल तक छोड़ने वाले वाहन स्कूल के अन्दर तक अपने वाहनों को ले जाते है ऐसे में इस स्कूल के द्वारा आंखे मूंदे रहना एक सवालिया निशान खड़ा करता है की आखिर इस पर कोई कारवाही क्यों नहीं की जा रही| दूसरी तरफ महगाई और बढ़ते पेट्रोल के दाम से आज स्कूल जाने वाले बच्चे भी सुरक्षित नहीं है, मुरादाबाद में बच्चो को स्कूल तक पहुचाने वाले अधिकतर वाहन पेट्रोल की जगह घरेलु गैस सिलेंडर का उपयोग कर रहे है जो बच्चो की सुरक्षा की दृष्टि से बेहद खतरनाक है| आज अभिभावक भी इसके लिये कम ज़िम्मेदार नहीं है जो कम पैसो में अपने बच्चो को स्कूल ले जाने वाले वाहन को तय करने में अधिक तरजीह देते है | अधिकतर देखा गया है और समाचार पत्रों में सुर्खियाँ भी बनती हुई खबर प्रकाशित होती है की स्कूल वैन में आग लगी, तह तक जाने में पता चला की उस वाहन में घरेलु गैस लगी होने की वजह से ऐसा दर्दनाक हादसा हुआ | उसके बाद भी छोटे-छोटे बच्चो की ज़िन्दगी से खिलवाड़ करने वाले वाहन स्वामी को इस बात से ज़रा भी फर्क नहीं पड़ता की पैसो की कमाई करने की होड़ में वो नौनिहालों की ज़िन्दगी से खेल रहे है साथ ही आज स्कूल के वाहनों में बच्चो की संख्या उस वाहन की क्षमता से काफी अधिक होती है ऐसे में स्कूल का प्रबंध तंत्र भी आंखे मूंदे रहता है जैसे उसे कुछ पता ही नहीं| ताज्जुब वाली बात है की सडको पर ठूस ठूस कर वाहनों से स्कूल तक ले जाये जा रहे बच्चो पर पुलिस की दृष्टि भी नहीं पड़ती|
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